क्या दलित और अल्पसंख्यक आतंकवादी होते है ?
आये दिन ख़बरों में किसी ना किसी आतंकवादी या शक के बिनाह पर आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लोगों का नाम छपता है | उन लोगों का नाम पढने के बाद एक ही सवाल मन में आता है , क्या सिर्फ दलित और अल्पसंख्यक ही आतंकवादी होते है ? या जो लोग दलित और अल्पसंख्यक होते है उन्ही पर आतंकवादी होने का शक किया जाता है | आज मेरी मुलाकत तारिक अनवर से हुई जो पटना यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता का छात्र है और साथ ही AISA का विश्वविद्यालय अध्यक्ष भी | तारिक भाई के साथ तीन और लोग जिनमे से दो से मेरी मुलाकात हुई है उनके नाम है आज़ाद चाँद और गौतम , ये दोनों भी जन अधिकार पार्टी के सदस्य है | ये चारों छात्र अल्पसंख्यक और दलित समुदाय से आते है और चारों को विश्विद्यालय प्रशासन ने निष्कासित किया है क्योंकि विश्विद्यालय को ये "शक" है कि ये छात्र आतंकवादी गतिविधियों में शामिल है |इन चारों छात्रों को गुनाह सिर्फ ये था की उन्होंने अपने डिपार्टमेंट में हो रहे जातिगत दुर्वयवहार के खिलाफ आवाज़ उठाई और देखते ही देखते ये मुद्दा एक बड़े आन्दोलन का रूप ले लिया | इस आन्दोलन में कई और छात्र हितों के मुद्दे जुड़े हुए थे , इस आन्दोलन से नाराज़ हिंदी और पत्रकारिता विभाग के हेड प्रोफेसर मटुक नाथ ने पटना विश्विद्यालय के कुलपति को चिट्ठी लिखी और इन छात्रों को सस्पेंड करने की मांग की साथ ही साथ ये भी लिखा की इन छात्रों से मेरी जान को खतरा है | इसके जवाब में विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन चार छात्रों को निष्कासित कर दिया | मज़े की बात ये है की विश्वविद्यालय को भी दलित और अल्पसंख्यक छात्रों से ही ज्यादा परेशानी और खतरा लगा | सिर्फ यही नहीं कई ऐसे केस है जिनमे लोगों को सिर्फ दलित और अल्पसंख्यक होने के कारण आतंकवादी का दंश झेलना पड़ रहा है | लक्ष्मणपुर बाथे हत्याकांड के आरोपी आज भी आज़ाद हवा में सांस ले रहे है , उनपर न सरकार की सख्ती दिखाई दी नाही पुलिस की | सिर्फ इस लिए कि वो दलित नहीं थे | सबसे अफ़सोस तब होता है जब देश के एक नामी संस्था जो काफी प्रगतिशील विचारधारा के है उसके एक सदस्य ने पूछा की "आमिर तुमको क्या लगता है की पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करना चाहिए ?" मेरा जवाब था "करने से पहले अच्छे से विचार करना चाहिए क्योंकि आतंकवादी देश घोषित करने के बाद वहां की आम जनता पर काफी दुष्प्रभाव पड़ेगा, उस जनता पर जो आतंकवादी नहीं है |" तब उस आदमी ने जवाब दिया "भाई अब आप पर भी पैनी नज़र रखनी पड़ेगी |" आज पुरे देश में धर्म को लेकर लोगों पर आतंकवाद से संबंध होने का शक किया जाता है , पर अब लोगों को अपनी मानसिकता बदलनी चाहिए | आज कई ऐसे लोग है जो अल्पसंख्यक या दलित समुदाय से आते हैं और उनके वजह से हिन्दुस्तान का नाम अलग अलग क्षेत्रों में बढ़ा है है | दलितों पर ऊँगली उठाने वालों को ये हमेशा याद रखना चाहिए कि इस देश का संविधान, जिस पर पूरा देश टिका हुआ है, वो भी एक दलित ने ही लिखा था |
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