भगत सिंह और उनके विचार
आज भगत सिंह का 109वां जन्मदिन है | बल्कि ये कहना उचित रहेगा की आज भगत सिंह के विचारों का 109वां जन्मदिन है | आज सुबह से ही कारगिल चौक के सामने वाली भगत सिंह की मूर्ति के इर्द गिर्द जमावड़ा लगा हुआ है | राजनैतिक दल चाहे वो उनकी विचारधारा को मानता हो या ना मानता हो अपने फायदे के लिए उनको भुनाने की कोशिश करता है | लेकिन मेरा ये मानना है की भगत सिंह को आज के दिन याद करने का सबसे बेहतर तरीका है उनके विचारों को पढना और उसे समझने की कोशिश करना | आज के कई नौजवान ऐसे है जो भगत सिंह की जीवनी से सिर्फ इसलिए प्रेरित है क्योंकि उन लोगों को अजय देवगन की एक्टिंग the legend of bhagat singh में काफी अच्छी लगी | उन्हें आज ज़रुरत है उनके विचारों को जानने की | मेरे जानकारी में कई ऐसे मित्र है जिन्हें अगर पता चले की भगत सिंह नास्तिक थे और वो किसी धर्म को नहीं मानते थे तो शायद वो उन्हें भी देशद्रोही करार दे दे |भगत सिंह का तो ये मानना था कि "
जो व्यक्ति भी विकास के लिए खड़ा है उसे हर एक रुढ़िवादी चीज़ की आलोचना करनी होगी उसमे अविश्वास करना होगा और उसे चुनौती देनी होगी |" भगत सिंह ने हमेशा अपने जीवन में कट्टरपंथ, जातिवाद, धर्म को कटघरे में खड़ा रखा |मेरे लिए भगत सिंह सिर्फ एक स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे , भगत सिंह उस देश की स्थापना की कोशिश की जहाँ पर मज़हब के नाम पर लोगों को बांटा ना जाये , जहाँ किसी के भी विकास में इसलिए बाधा ना डाली जाये क्योंकि वो एक दलित है | सोच के और भी ज्यादा ताज्जुब होता है की ये सारे विचार एक २२-२३ साल के नौजवान के थे | अगर भगत सिंह इतने कम उम्र में शहीद ना होते तो शायद इस देश की स्थिति पूरी तरह से भिन्न होती | लेकिन अभी भी ये बदलाव मुमकिन है क्योंकि भगत सिंह शायद ही आज ना हो लेकिन उनके विचार आज भी है | आज बहुत सारे ऐसे भी संगठन है जो भगत सिंह जयंती पर धरना-प्रदर्शन की तैय्यारी में है उनसे गुजारिश है की धरना-प्रदर्शन से अच्छा है कि आप लोगों के पास भगत सिंह के विचार अलग अलग माध्यम चाहे वो गीत, गोष्ठियां, सभा, नाटक आदि से पहुंचाए, क्योंकि अगर एक बार आम जनता ने भगत सिंह के विचारों को समझ लिया तो "इन्कलाब" आ के रहेगा |