Saturday, 24 September 2016


कई बार कट्टरपंथी चाहे वो किसी भी मज़हब ,धर्म या सम्प्रदाय को मानने वाले हो उनकी एक समान आदत है दुसरे मज़हब को गाली देने की | मेरी परवरिश एक प्रगतिशील माहोल के घर में हुई | जिस स्कूल में मैं पढने जाता था वो स्कूल पूर्णत धार्मिकता से लैस था | वहां केवल धर्म की बातें बताई जाती थी | मेरी मजबूरी थी की उसी स्कूल में पढूं क्योंकि मेरी माँ उसी स्कूल में हॉस्टल वार्डन का काम करती थी | वहां भी यह आम बात थी कि दुसरे धर्म के बारे में अपशब्द कहना | कई बार मेरी बहस कई शिक्षकों और छात्रओं से इस बारे में हुई | जब मैं आठवीं में पहुंचा तो हमारे इस्लामिक के नये टीचर आये | उनका पहला क्लास था और मैं हमेशा की तरह इसी उम्मीद में की आते ही इस्लाम का गुण गान और दुसरे धर्म की बुराई करेंगे | उनका पहला सवाल सभी से था -" क्या आप सभी मुसलमान है ?" बच्चों ने एक आवाज़ में कहा - "बेशक" | सर ने फिर पूछा " सोच लो मतलब तुम लोगों ने इस्लाम पर अपने सारे पैगम्बरों पर खुदा की सारी किताबों पर ईमान लाया है ?" " जी हाँ सर "| "तो अब बताओ अब तक कितने पैगम्बर हुए ?" किसी ने हाथ उठा करा जवाब दिया " कम-ओ-बेश १ लाख ३४ हज़ार "| सर ने कहा - एक दम सही कितनो के नाम हम जानते है १०, 20, बहुत आलिम फ़ाज़िल है तो ५० | लेकिन बाकी के पैगम्बरों का क्या ? उनका ब्यौरा हमारे पास नहीं है | हमें उनके बारे में नहीं पता है | खुदा ने कहा कि मैंने हर जगह पैगम्बर भेजे , तो यक़ीनन पैगम्बर हिन्दुस्तान में भी आये होंगे | हमें तो उनका पता तो है नहीं | हो सकता है वो पैगम्बर गौतम बुद्ध हो, भगवान् राम या कृष्ण हो | क्योंकि उन लोगों ने भी वही काम किया जो खुदा के पैगम्बर , जिनका हम नाम जानते है , उन्होंने किया | अगर आप इन लोगों को या इनके मज़हब को गाली देते है तो यक़ीनन आप इस्लाम और उसके पैगम्बरों को गालिया रहे है | और उस सूरत-ए-हाल में आपको मुसलमान कहलाने का नाम नहीं है |" आज जब भी खबरों में या कहीं भी कोई भी किसी के धर्म को अपशब्द कहता है तब एक ही ख्याल मन में आता है की काश सारे लोग ना सही लेकिन अधिकतर लोगों की सोच वही हो जो उस टीचर की थी | - आमिर

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